चमकती आंखें और चेहरे पर मुस्कान लिए खड़ी उस नन्ही बच्ची ने कहा 'मेरे पीछे पीछे आ जाइए'.
नंगे पैर तेज़ चाल चल रही वो लड़की हमें एक दरवाज़े के आगे खड़ा करके तपती दोपहर में कहीं ग़ायब हो गई.
जैसे ही दरवाज़ा खुला तो तकरीबन साढ़े पांच फीट लंबा एक लड़का सामने आ खड़ा हुआ. चेहरे पर हल्की मुस्कान और गरमजोशी से हाथ मिला कर स्वागत करने वाला ये लड़का प्रिंस था.
वही प्रिंस जिसकी सलामती के लिए 13 साल पहले पूरे देश ने दुआ की थी ताकि उस गहरे बोरवेल से उसे बाहर निकाला जा सके.
हम पहुंचे थे हरियाणा के कुरूक्षेत्र ज़िले के गांव हलदेहेड़ी. वही गांव जहां चार साल के प्रिंस को बचाने के लिए तकरीबन 50 घंटे बचाव कार्य जारी रहा था.
मीडिया के कैमरों की फ्लैश और न्यूज़ चैनलों की ओबी वैनों का जमावड़ा बॉलीवु़ड फिल्म पीपली लाईव के दृश्यों से कम नहीं था.
प्रिंस के घर के अंदर दाखिल होते ही मकान की दीवारों और फर्श पर पड़ीं दरारें परिवार की आर्थिक हालत बयां कर रहीं थीं.
घर में शौचालय तो बना है लेकिन दरवाजा नहीं लगा था और निजता की रक्षा पर्दा कर रहा था.
हमें बैठे कुछ पल ही हुए थे कि प्रिंस के पिता रामचंद्र घर के एक कमरे से निकल कर हमारे पास आ कर बैठ गए और उनके पीछे-पीछे प्रिंस और उसका छोटे भाई चाय-पानी ले आए.
प्रिंस की मां के बारे मे पूछा तो पता चला कि वो गांव में ही एक भजन-कीर्तन में शामिल होने गईं हैं.
"और बताइए काम पर नहीं गए" प्रिंस के पिता से ये सवाल पूछा तो उनका जवाब था, ''कोई बात नहीं दोपहर बाद चला जाउंगा, दिहाड़ी-मज़दूरी के दौरान मिलने आना मुश्किल है.''
हमने पूछा साल 2006 में प्रिंस के बोरवेल में गिरना और अचानक सारी दुनिया से उनके परिवार का परिचय होना कैसा था और अब ज़िंदगी कैसी चल रही है?
रामचंद्र कहने लगे, ''देखो जी, उस समय पता नहीं कहां-कहां से लोग आए थे. हम मशहूर हो गए, हमें कुछ पैसे भी मिले तभी तो जो ये पक्का मकान आप देख रहें हैं बन पाया.''
रामचंद्र आगे कहने लगे कि उन दिनों काफ़ी व्यस्तता थी पर धीरे-धीरे ज़िंदगी पहले जैसी हो गई और हम दिहाड़ी-मज़दूरी करके पेट पालने लगे.
इसी दौरान गली में शायद मोटरसाइकिल पर आए एक लड़के ने आवाज़ दी, 'प्रिंस...प्रिंस...'
प्रिंस कुछ देर के लिए बाहर गया और अंदर आ कर धीरे से कहने लगा, ''अगर आपको मुझसे बातचीत करना चाहते हैं तो कृप्या जल्दी कर लें, मुझे पास वाले गांव में एक दोस्त के बर्थडे पार्टी में जाना है.''
बातचीत करने से पहले वो हमें दो घर छोड़कर उस जगह ले गया जहां वो बोरवेल में गिरा था.
हालांकि जिस जगह वो बोरवेल था उसे मिट्टी से भर दिया गया है और उससे कुछ ही दूरी पर सारे गांव को पानी की आपूर्ति के लिए नया बोर किया गया है.
घर की तरफ वापस आते हुए प्रिंस से जब पूछा कि कुछ याद आता है कि बोरवेल में कैसे गिरे थे?
प्रिंस ने कहा, ''हां, थोड़ा-थोड़ा, मैं और मेरा दोस्त खेल रहे थे. एक घर से हमने एक चुहिया निकलती देखी. वो चुहिया एक बोरी के नीचे छिप गई थी उसी बोरी से उस बोरवेल को ढंका गया था.''
''मैं चुहिया को मारने के लिए बोरी पर कूदने लगा, अचानक मेरे पैर पाइप के अंदर चले गए. मेरा दोस्त मेरा हाथ पकड़ कर खींचने लगा. गर्मी की वजह से पसीना आने लगा और मेरा हाथ फिसल गया और मैं अंदर गिर गया.''
ये घटना साल 2006 में घटी थी. 21 जुलाई के दिन प्रिंस 60 फ़ीट गहरे गढ्ढे में गिर गया, 23 जुलाई को भारतीय फ़ौज ने उसे बाहर निकाला था.
जब घटना का पता चला तो कुछ ही समय में पूरा प्रशासनिक अमला घटनास्थल पर पहुंच गया, पर प्रिंस को निकाल पाना आसान नहीं था.
इसके बाद भारतीय फ़ौज ने मोर्चा संभाला और करीब 50 घंटे बाद प्रिंस को बोरवेल से बाहर निकाला जा सका.
जब तक बचाव कार्य जारी रहा तब तक पूरे देश का मीडिया पल-पल की ख़बर लोगों तक पहुंचाता रहा.
पूरे देश में लोगों ने दुआ की थी कि किसी तरह इस बच्चे को सही सलामत बाहर निकाल लिया जाए.
कुछ मीडिया और अन्य संस्थानों ने तो प्रिंस की पढ़ाई का ख़र्च उठाने तक का एलान कर दिया था.
प्रिंस ने कहा, ''कुछ न्यूज़ वालों ने पढ़ाई का ख़र्चा देने की बात की थी, पर किसी का कुछ पता नहीं चला. दूसरी और तीसरी कक्षा की पढ़ाई प्राइवेट स्कूल से की थी. फिर पैसों की दिक़्क़त हुई तो सरकारी स्कूल में दाख़िला लेना पड़ा.''
प्रिंस के आगे कहते हैं, ''9वीं और 10वीं कक्षा में फिर प्राइवेट स्कूल का रुख़ किया, ख़र्च एक फ़ौजी ने उठाया लेकिन पास नहीं हुआ, आख़िर में दाख़िला गांव के पास वाले सरकारी स्कूल में लेना पड़ा''
भारतीय फ़ौज में शामिल होने का सपना
10वीं की पढ़ाई के बाद क्या करना है? इस सवाल के जवाब में प्रिंस ने कहा कि मैं भारतीय फ़ौज का हिस्सा बनना चाहूंगा क्योंकि फ़ौज वालों ने मुझे बोरवेल से निकाला था.
जब 2006 में बचाव कार्य पूरा हुआ तो भारतीय फ़ौज के अंबाला रिक्रूटमेंट केंद्र की तरफ से एक पत्र जारी किया गया था.
पत्र के अनुसार, ''जब प्रिंस 18 साल का हो जाए और सारी शर्तें पूरी करेगा तो उसे सेना में भर्ती पर तरजीह दी जाएगी.''
नंगे पैर तेज़ चाल चल रही वो लड़की हमें एक दरवाज़े के आगे खड़ा करके तपती दोपहर में कहीं ग़ायब हो गई.
जैसे ही दरवाज़ा खुला तो तकरीबन साढ़े पांच फीट लंबा एक लड़का सामने आ खड़ा हुआ. चेहरे पर हल्की मुस्कान और गरमजोशी से हाथ मिला कर स्वागत करने वाला ये लड़का प्रिंस था.
वही प्रिंस जिसकी सलामती के लिए 13 साल पहले पूरे देश ने दुआ की थी ताकि उस गहरे बोरवेल से उसे बाहर निकाला जा सके.
हम पहुंचे थे हरियाणा के कुरूक्षेत्र ज़िले के गांव हलदेहेड़ी. वही गांव जहां चार साल के प्रिंस को बचाने के लिए तकरीबन 50 घंटे बचाव कार्य जारी रहा था.
मीडिया के कैमरों की फ्लैश और न्यूज़ चैनलों की ओबी वैनों का जमावड़ा बॉलीवु़ड फिल्म पीपली लाईव के दृश्यों से कम नहीं था.
प्रिंस के घर के अंदर दाखिल होते ही मकान की दीवारों और फर्श पर पड़ीं दरारें परिवार की आर्थिक हालत बयां कर रहीं थीं.
घर में शौचालय तो बना है लेकिन दरवाजा नहीं लगा था और निजता की रक्षा पर्दा कर रहा था.
हमें बैठे कुछ पल ही हुए थे कि प्रिंस के पिता रामचंद्र घर के एक कमरे से निकल कर हमारे पास आ कर बैठ गए और उनके पीछे-पीछे प्रिंस और उसका छोटे भाई चाय-पानी ले आए.
प्रिंस की मां के बारे मे पूछा तो पता चला कि वो गांव में ही एक भजन-कीर्तन में शामिल होने गईं हैं.
"और बताइए काम पर नहीं गए" प्रिंस के पिता से ये सवाल पूछा तो उनका जवाब था, ''कोई बात नहीं दोपहर बाद चला जाउंगा, दिहाड़ी-मज़दूरी के दौरान मिलने आना मुश्किल है.''
हमने पूछा साल 2006 में प्रिंस के बोरवेल में गिरना और अचानक सारी दुनिया से उनके परिवार का परिचय होना कैसा था और अब ज़िंदगी कैसी चल रही है?
रामचंद्र कहने लगे, ''देखो जी, उस समय पता नहीं कहां-कहां से लोग आए थे. हम मशहूर हो गए, हमें कुछ पैसे भी मिले तभी तो जो ये पक्का मकान आप देख रहें हैं बन पाया.''
रामचंद्र आगे कहने लगे कि उन दिनों काफ़ी व्यस्तता थी पर धीरे-धीरे ज़िंदगी पहले जैसी हो गई और हम दिहाड़ी-मज़दूरी करके पेट पालने लगे.
इसी दौरान गली में शायद मोटरसाइकिल पर आए एक लड़के ने आवाज़ दी, 'प्रिंस...प्रिंस...'
प्रिंस कुछ देर के लिए बाहर गया और अंदर आ कर धीरे से कहने लगा, ''अगर आपको मुझसे बातचीत करना चाहते हैं तो कृप्या जल्दी कर लें, मुझे पास वाले गांव में एक दोस्त के बर्थडे पार्टी में जाना है.''
बातचीत करने से पहले वो हमें दो घर छोड़कर उस जगह ले गया जहां वो बोरवेल में गिरा था.
हालांकि जिस जगह वो बोरवेल था उसे मिट्टी से भर दिया गया है और उससे कुछ ही दूरी पर सारे गांव को पानी की आपूर्ति के लिए नया बोर किया गया है.
घर की तरफ वापस आते हुए प्रिंस से जब पूछा कि कुछ याद आता है कि बोरवेल में कैसे गिरे थे?
प्रिंस ने कहा, ''हां, थोड़ा-थोड़ा, मैं और मेरा दोस्त खेल रहे थे. एक घर से हमने एक चुहिया निकलती देखी. वो चुहिया एक बोरी के नीचे छिप गई थी उसी बोरी से उस बोरवेल को ढंका गया था.''
''मैं चुहिया को मारने के लिए बोरी पर कूदने लगा, अचानक मेरे पैर पाइप के अंदर चले गए. मेरा दोस्त मेरा हाथ पकड़ कर खींचने लगा. गर्मी की वजह से पसीना आने लगा और मेरा हाथ फिसल गया और मैं अंदर गिर गया.''
ये घटना साल 2006 में घटी थी. 21 जुलाई के दिन प्रिंस 60 फ़ीट गहरे गढ्ढे में गिर गया, 23 जुलाई को भारतीय फ़ौज ने उसे बाहर निकाला था.
जब घटना का पता चला तो कुछ ही समय में पूरा प्रशासनिक अमला घटनास्थल पर पहुंच गया, पर प्रिंस को निकाल पाना आसान नहीं था.
इसके बाद भारतीय फ़ौज ने मोर्चा संभाला और करीब 50 घंटे बाद प्रिंस को बोरवेल से बाहर निकाला जा सका.
जब तक बचाव कार्य जारी रहा तब तक पूरे देश का मीडिया पल-पल की ख़बर लोगों तक पहुंचाता रहा.
पूरे देश में लोगों ने दुआ की थी कि किसी तरह इस बच्चे को सही सलामत बाहर निकाल लिया जाए.
कुछ मीडिया और अन्य संस्थानों ने तो प्रिंस की पढ़ाई का ख़र्च उठाने तक का एलान कर दिया था.
प्रिंस ने कहा, ''कुछ न्यूज़ वालों ने पढ़ाई का ख़र्चा देने की बात की थी, पर किसी का कुछ पता नहीं चला. दूसरी और तीसरी कक्षा की पढ़ाई प्राइवेट स्कूल से की थी. फिर पैसों की दिक़्क़त हुई तो सरकारी स्कूल में दाख़िला लेना पड़ा.''
प्रिंस के आगे कहते हैं, ''9वीं और 10वीं कक्षा में फिर प्राइवेट स्कूल का रुख़ किया, ख़र्च एक फ़ौजी ने उठाया लेकिन पास नहीं हुआ, आख़िर में दाख़िला गांव के पास वाले सरकारी स्कूल में लेना पड़ा''
भारतीय फ़ौज में शामिल होने का सपना
10वीं की पढ़ाई के बाद क्या करना है? इस सवाल के जवाब में प्रिंस ने कहा कि मैं भारतीय फ़ौज का हिस्सा बनना चाहूंगा क्योंकि फ़ौज वालों ने मुझे बोरवेल से निकाला था.
जब 2006 में बचाव कार्य पूरा हुआ तो भारतीय फ़ौज के अंबाला रिक्रूटमेंट केंद्र की तरफ से एक पत्र जारी किया गया था.
पत्र के अनुसार, ''जब प्रिंस 18 साल का हो जाए और सारी शर्तें पूरी करेगा तो उसे सेना में भर्ती पर तरजीह दी जाएगी.''
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